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*धार,कांग्रेसी-भाजपा सकते में साधी चुप्पी, अब क्या होगा स्थानीय नेताओं का भविष्य,बदलेंगे कई समीकरण*


*इधर भोपाल,बेंगलुरु,जयपुर और दिल्ली तक भाजपा और कांग्रेस में मप्र में सरकार बनाने को लेकर युद्ध छिड़ा हुआ है। वही दूसरी तरफ धार जिले सहित मप्र के अन्य भाजपा-कांग्रेस नेता फिलहाल सिर्फ तमाशबीन बनकर बैठ गए है। उनकी हालत यह है कि जो हड्डी अभी गले मे फंसती दिखाई दे रही है। उसे निगल नही पा रहे है तो उगल भी नही। क्योकि बडे नेताओ से ज्यादा उन्हें अपने भविष्य की चिंताएं सता रही है। दरअसल इसलिए क्योंकि सिंधिया  भाजपा में जा चुके है अब धार में उनके खास कहे जाने वाले दलबदलू, करनसिंह पवार भी  भाजपा में पहले ही जा चुके  है। जबकि बदनावर से कांग्रेस विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगाव के भी कांग्रेस से अलविदा करने की बात इस वक्त जोरों पर है। लिहाजा अब धार सहित जिले में भाजपा कांग्रेस के समीकरण में जबरजस्त बदलाव हो जाएगा। इधर बदनावर सीट को लेकर बुंदेला गुट और दत्तीगाव गुट में जोरदार उठापटक शुरू हो जाएगी। क्योकि जहां धार में भाजपा की तरफ से सिंधिया समर्थक करनसिंह पंवार भी अपनी दावेदारी  में होंगे तो सिंधिया का भी जोर होगा कि उनके खास समर्थको को वह हर जगह एडजस्ट करते चले।  दूसरी तरफ इस सीट को एकतरफा कब्जा जमाकर बैठे बालमुकुंद सिंह गौतम। लिहाजा बदनावर को लेकर दत्तीगाव भाजपा से खड़े हुए तो यहां पुरानी पेठ रखने वाले कुलदीप सिंह बुंदेला कांग्रेस की और से मोर्चा संभाल सकते है। इधर अब इन हालातों में धार  भाजपा में जोरदार आपसी युद्ध शुरू हो जाएगा। क्योंकि  दावेदार इस  नए समीकरण के तहत गहरा असन्तोष पैदा करेगे। इधर जिले में सिंधिया गुट की दलबदलू नीति की वजह से कांग्रेस-भाजपा में खुशी गम जैसे हालात बन रहे है